संपूर्ण जिले में नलकूप खनन करने पर कलेक्टर ने लगाया प्रतिबंध 

सीहोर,  एमपी मीडिया पाइंट 

      कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की जानकारी अनुसार जिले में सामान्य वर्षा 1148.40 मि.मी के स्थान पर वर्ष 2018 में 889.10 मि.मी औसत वर्षा हुई है जो सामान्य वर्षा से 22.58 प्रतिशत कम है। वर्ष 2017 में भी सीहोर जिले में सामान्य वर्षा से 26 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी, लगातार दो वर्षों से जिले में अल्प वर्षा के कारण भू-जल स्तर में गिरावट आने के कारण आगामी समय में जिले में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न होने की आशंका है। यदि जिले में वर्तमान जल स्त्रोतों में उपलब्ध जल का पेयजल के अतिरिक्त अन्य प्रयोजनों के लिए उपयोग किये जाने पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो जिले में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न होने की आशंका है।
      कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी गणेश शंकर मिश्रा द्वारा म.प्र. पेयजल परिक्षण अधिनियम 1986 तथा संशोधन अधिनियम 2002 में धारा 3 के अन्तर्गत सीहोर जिले को जल अभाव ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है और धारा 4(1) के अन्तर्गत जिले के समस्त जल स्त्रोतों, यथा बांध, नदी नहर, जलधारा, धरना, झील, जलाशय, नाला, बंधान, नलकूप या कुआ से किसी भी साधन से घरेलू प्रयोजन व निस्तार को छोड़क सिंचाई या औद्योगिक, व्यवसायिक अथवा किसी अन्य प्रयोजन के लिए (पूर्व से अनुमति प्राप्त को छोड़कर) जल उपयोग करने के लिए प्रतिबंधित किया गया है।
      जिले में निरंतर भू-जल स्तर की गिरावट को दृष्टिगत रखते हुए धारा 6 (1)के अन्तर्गत संपूर्ण जिले में अशासकीय व निजी नलकूप खनन करने पर प्रतिबंध लगाया गया। जिले की सीमा क्षेत्र की सीमा में नलकूप/बोरिंग संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी की अनुमति के बिना न तो प्रवेश करेगी (सार्वजनिक सड़को से गुजरने वाली मशीनों को छोड़कर) और न ही बिना अनुति के कोई खनन करेगी। प्रत्येक राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों को ऐसी बोरिंग मशीनें जो अवैध रूप से जिले में प्रतिबंधित स्थानों पर प्रवेश करेगी अथवा नलकूप खनन/बोरिंग का प्रयास कर रही मशीनों को जप्त कर पुलिस में एफ.आई.आर दर्ज कराने का अधिकार होगा। इस अधिसूचना का उल्लंघन करने पर मप्र पेयजल परिक्षण अधिनियम 1986 की धारा 9 के अनुसार दो वर्ष तक के कारावास या दो हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों से दंडित करने का प्रावधान है। यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा। 
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