इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा लग रही है इसलिए ये त्योहार दो दिन मनाया जाएगा. जानते हैं साल 2023 में रक्षाबंधन का मुहूर्त, शुभ योग, विधि से लेकर समस्त जानकारी.



इन चीज़ों के बिना अधूरी है राखी 

राखी बांधने से पहले राखी की थाल सजाएं. इसमें मिठाई, कुमकुम, अक्षत, दीपक, रुमाल, नारियल राखी जरूर रखें. इनके बिना राखी अधूरी मानी जाती है.  राखी बांधते वक्त सबसे पहले भाई को माथे पर तिलक लगाएं. उसके बाद भाई पर अक्षत छीटें.  बहनें अपने भाई के दाहिने हाथ पर राखी बांधें. राखी बांधने के बाद  बहन भाई की आरती उतारें. अगर भाई बड़ा है तो उसके पैर छूकर भाई से आशीर्वाद लें. 

 
राखी बांधने का मंत्र 

रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधते समय ‘येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि, रक्षे माचल माचल:।।’ मंत्र का जाप करना चाहिए. भाई की उन्नति के लिए ये शुभ माना जाता है

 
भाई के लिए शुभ है यही राखी 

भाई बहन का रिश्ता बहुत पवित्र धागे से बंधा होता है इसलिए रक्षाबंधन पर भाई के लिए राखी लेते समय कुछ खास बातों का जरूर ख्याल करें. हमेशा रेशम के धागे या सूती धागे वाली राखी को ही सर्वोतम माना जाता है. इसके बाद सोने और चांदी से बनी राखियां अच्छी होती हैं

भाई के लिए शुभ है यही राखी 

भाई बहन का रिश्ता बहुत पवित्र धागे से बंधा होता है इसलिए रक्षाबंधन पर भाई के लिए राखी लेते समय कुछ खास बातों का जरूर ख्याल करें. हमेशा रेशम के धागे या सूती धागे वाली राखी को ही सर्वोतम माना जाता है. इसके बाद सोने और चांदी से बनी राखियां अच्छी होती हैं

रक्षाबंधन पर बहन को भूलकर भी न दें ऐसे तोहफे

रक्षाबंधन पर सभी भाई अपनी बहन को सामार्थ्यनुसार तोहफे जरूर देते हैं. लेकिन इस दिन नुकीली चीजें जैसे कांटा, छुरी, मिक्सर ग्राइडर, जूसर, आइना, फोटो फ्रेम, जूते-चप्पल, रूमाल आदि चीजें उपहार में न दें.

रक्षाबंधन पर बहन को भूलकर भी न दें ऐसे तोहफे 

रक्षाबंधन पर सभी भाई अपनी बहन को सामार्थ्यनुसार तोहफे जरूर देते हैं. लेकिन इस दिन नुकीली चीजें जैसे कांटा, छुरी, मिक्सर ग्राइडर, जूसर, आइना, फोटो फ्रेम, जूते-चप्पल, रूमाल आदि चीजें उपहार में न दें.

 
रक्षाबंधन पर 700 बाद पंच महायोग 

इस साल रक्षाबंधन का पर्व बहुत शुभ रहने वाला है. रक्षाबंधन पर 30 अगस्त को सूर्य, बुध, गुरु, शुक्र और शनि ग्रह पंच महायोग बनाएंगे, जिससे राखी बांधने के शुभ फल में कई गुणा वृद्धि होगी.

 
रक्षाबंधन के नाम का अर्थ क्या है 

रक्षाबंधन का नाम संस्कृत शब्दावली से लिया गया हैं. इसमें रक्षा का अर्थ होता है ‘रक्षा करना’ और बंधन का अर्थ होता है बांधना. रक्षाबंधन में बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है.

भाई की राशि के अनुसार राखी का रंग 

मेष राशि (Aries) – लाल रंग
वृष राशि (Taurus) – नीला रंग
मिथुन राशि (Gemini) – हरा रंग
सिंह राशि (Leo)– सफेद रंग
कर्क राशि (Cancer)– सुनहरा या पीला रंग
कन्या राशि (Virgo) – हरा रंग
तुला राशि (Libra) – सफेद या सुनहरा सफेद रंग
वॄश्चिक राशि (Scorpio) – लाल रंग
धनु राशि (Sagittarius) – पीला रंग
मकर राशि (Capricorn) – नीला रंग
कुम्भ राशि (Aquarius) – नीला रंग
मीन राशि (Pisces)– सुनहरा, पीला या हल्दी रंग

 
रक्षाबंधन का सबसे शुभ मुहूर्त
30 अगस्त 2023 को पूरे दिन भद्रा का साया रहेगा. कुछ लोग सूर्यास्त के बाद राखी नहीं बांधते. ऐसे में अगर आप 31 अगस्त को रक्षाबंधन मना रहे हैं तो राखी बांधने के लिए ब्रह्मा मुहूर्त को सबसे शुभ माना गया है. आज 31 अगस्त को सुबह 4:26 से 5:14 के बीच राखी बांध सकते हैं.
 
 
रक्षाबंधन के दिन न खाएं ये चीजें 

रक्षाबंधन के दिन घर पर मांस, मंदिरा या प्याज-लहसुन युक्त तामसिक भोजन से परहेज करें. इस दिन कुछ मीठा जरूर बनाएं और शुद्ध व सात्विक भोजन का ही सेवन करें.

रक्षाबंधन पर ऐसी राखी न बांधे 

रक्षाबंधन के दिन प्लास्टिक से बनी राखी बिल्कुल भी न बांधे, क्योंकि प्लास्टिक को केतु ग्रह का पदार्थ माना गया है. इसलिए ऐसी राखी बांधना अशुभ होता है. इसके साथ ही टूटी-फूटी या खंडित राखी और अशुभ चिह्नों वाली भी रक्षाबंधन पर न बांधे.

 
रक्षाबंधन पर भद्राकाल कब से कब तक 

30 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन सुबह 10:59 से भद्रा लग जाएगी और इसका समापन रात्रि 09:02 पर होगा. ऐसे में रक्षाबंधन पर पूरे दिन भद्रा का साया रहने वाला है. इसलिए आप भद्रा समाप्त होने के बाद ही रात्रि में भाई को राखी बांधे. या फिर अगले दिन 31 अगस्त को सुबह 07:04 तक भी राखी बांध सकते हैं.

 
 (राखी किस हाथ में पहननी है?)

बहन को अपने भाई को दाहिने हाथ की कलाई पर राखी पहनानी चाहिए. यानि भाई के सीधे हाथ में राखी बांधना शुभ होता है.

 
 (क्या राखी रात में बांध सकते हैं?)

साल 2023 में रक्षाबंधन का मुहूर्त 30 अगस्त की रात में 9:01 मिनट पर शुरु होगा. 30 अगस्त को पूरे दिन भद्रा का साया है. जिस वजह से आप रात को 9:01 मिनट के बाद राखी बांध सकते हैं. मुहूर्त चाहे दिन का हो या रात का शुभ मुहूर्त में राखी बांधना लाभकारी होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भद्राकाल में राखी बांधना वर्जित है. इस साल राखी बांधने का शुभ रात का है, इसलिए ये साफ है कि राखी रात में भी बांधी जा सकती है.

 (भद्रा काल क्या होता है?)

भद्रा काल को शुभ नहीं माना जाता. इसीलिए इस काल के समय कोई शुभ काम नहीं किया जाता. इसीलिए इस काल के समय राखी बांधने पर भी मनाई है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण की बहन ने इसी काल में रावण को राखी बांधी थी, इसीलिए रावण का अंत श्री राम के हाथों हुआ.


भद्रा सूर्य देव और माता छाया की पुत्री है और शनि देव की बहन. भद्रा का जन्म दैत्यों का विनाश करने के लिए हुआ था.

 
 (रक्षाबंधन की कैसे हुई शुरुआत?)

एक बार असुर और देवताओं के बीच युद्ध हुआ और इस युद्ध में असुर काफी हावी हो गए. जिसकी वजह इंद्र की पत्नी शचि को अपने पति और देवताओं की चिंता सताने लगी. फिर उन्होंने इंद्र के लिए एक शक्तिशाली सुरक्षात्मक धागा बनाया. कहा जाता है कि तभी से शुभ कार्य में जाने से पहले हाथ में मौली बांधने की परंपरा शुरू हुई. रक्षाबंधन के त्योहार की भी शुरुआत तभी से मानी जाती है.

 
पहली राखी किसने बांधी? 

एक बार राजा बलि ने अश्वमेघ यज्ञ कराया था, उस समय भगवान विष्णु ने बौने का रुप धारण किया और राजा बलि से 3 पग भूमि दान में मांगी. राजा बलि इसके लिए तैयार हो गए और जैसे ही उन्होंने हां कहा, वामन रुपधारी भगवान विष्णु ने धरती और आकाश को अपने दो पगों से नाप दिया. इसके बाद उनका विशाल रुप देखकर राजा बलि ने अपने सिर उनके चरणों में रख दिया. फिर भगवान से वरदान मांगा कि जब भी मैं भगवान को देखूं तो आप ही नजर आएं. हर पल सोते जागते उठते बैठते आपको देखना चाहता हूं. भगवान ने उन्हें वरदान दिया और उनके साथ रहने लगे. 


जिसके बाद माता लक्ष्मी परेशान हो गईं और नारद मुनि को सारी बात बताई. नारद जी ने कहा कि आप राजा बलि को अपना भाई बनाकर भगवान विष्णु के बारे में पूछो. इसके बाद माता लक्ष्मी राजा बलि के पास रोते हुए पहुंची तो राजा ने पूछा कि आप क्यों रो रही हैं, मुझे बताइए मैं आपका भाई हूं. यह सुनकर माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधी और भगवान विष्णु को मुक्त करने का वचन लिया. तभी से रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है.

रक्षा बंधन 2023 में कितने दिन बाकी हैं? 

रक्षाबंधन का पर्व साल 2023 में दो दिन मनाया जाएगा. इस हिसाब से देखे तो 30 अगस्त को रात 9:01 मिनट के बाद आप इस पर्व को मना सकते हैं, वहीं जो लोग 31 अगस्त के दिन राखी बांधेंगे वो सुबह 5:55 मिनट से  7:05 मिनट तक राखी बांध सकते हैं.

 
रक्षाबंधन कब है 2023 शुभ मुहूर्त? 

30 अगस्त के दिन अपने भाई को राखी बांधना चाहते हैं तो रात 9:01 मिनट के बाद बांधे. वहीं 31 अगस्त की बात करें तो इस दिन आप सुबह 5:55 मिनट से  7:05 मिनट तक राखी बांध सकते हैं.

 
रक्षाबंधन कब है 2023 शुभ मुहूर्त? 

साल 2023 में रक्षाबंधन दो दिन मनाया जाएगा, यानि 30 और 31 अगस्त दोनों ही दिन आप राखी बांध सकते हैं. लेकिन इस साल 30 अगस्त को पूरे दिन भद्रा काल का साया होने की वजह से 30 अगस्त के दिन मुहूर्त का समय बहुत कम है.

बैकग्राउंड

 30 और 31 अगस्त 2023 को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा. इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा लग रही है इसलिए ये त्योहार दो दिन मनाया जाएगा. शास्त्रों के अनुसार रक्षाबंधन पर सिर्फ शुभ मुहूर्त में ही भाई को राखी बांधनी चाहिए. इसके लिए भद्रा काल जरुर देखें, क्योंकि भद्रा में राखी बांधना अशुभ माना जाता है.

सावन पूर्णिमा पर हर साल रक्षाबंधन के दिन बहनें भाई की उन्नति, अच्छे स्वास्थ और उज्जवल भविष्य के लिए उसकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं, बदले में भाई भी बहन को उपहार और उसकी रक्षा का वचन देते हैं. आइए जानते हैं साल 2023 में रक्षाबंधन का मुहूर्त, शुभ योग, विधि से लेकर समस्त जानकारी.

रक्षाबंधन 2023 का महत्व

रक्षाबंधन का पर्व प्राचीन काल से ही मनाया जाता आ रहा है. राजा महाबलि जब भगवान विष्णु को अपने साथ पाताल ले गए थे तो मां लक्ष्मी ने उन्हें वापस पाने के लिए ब्राह्मणी बनकर राजा महाबलि को राखी बांधी थी और उनसे विष्णु जी को वापस बैकुंठ ले जाने का वचन मांगा था, जिसे महाबलि ने पूरा किया.

ये त्योहार हर युग में मनाया गया है. द्वापर युग में जब शिशुपाल का वध करते समय सुदर्शन चक्र से श्रीकृष्ण की उंगली कट गई तो द्रोपदी ने अपनी साड़ी पल्लू फाड़कर उनकी उंगली में बांध दिया. कान्हा ने द्रोपदी को वचन दिया कि वह उन्हें भाई की तरह हर समय उनकी रक्षा करेंगे.

रक्षाबंधन 2023 तिथि

श्रावणी या सावन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 अगस्त सुबह 10:58 मिनट से हो रही है और इसका समापन 31 अगस्त को सुबह 07:05 मिनट पर होगा. 30 अगस्त को रक्षा बंधन मनाया जाएगा, लेकिन पूरे दिन भद्रा होने से रात में रक्षा सूत्र बांधने के मुहूर्त रहेगा. पूर्णिमा तिथि शुरू होने पर ही भद्रा भी शुरू हो जाएगी, जो कि रात में 09.01 बजे तक रहेगी. ऐसे में 30 अगस्त की रात में 09.02  से 31 अगस्त की सुबह 7.35 तक रक्षा सूत्र बांध सकेंगे.

 

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