पटना : नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि  मोदी जी बेरोजगारी पर बात करने पर आपका गला क्यों सुख जाता है। किसी भी सरकार की सफलता, गुणवत्ता व दूरदर्शिता का प्रतीक उसकी आर्थिक व सामाजिक नीतियां होती हैं। मोदी सरकार देश के सामाजिक स्वरूप को उधेड़-उधेड़ कर अराजकता की ओर मोड़ रही है तो दूसरी तरफ अपने स्टंट के जरिए देश के आर्थिक विकास के पहिए ही उखाड़ अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार दिया है।


श्री यादव ने कहा कि रोजगार सृजन से अर्थव्यवस्था का अंदाजा लग जाता है। लेकिन यहां तो दो करोड़ नौकरी प्रति वर्ष का नारा लगाने वाले 5 साल में उसके सौवें भाग तक भी उस वादे को निभा नहीं पाए। एनएसएस की रिपोर्ट के अनुसार इन पांच सालों में पचास साल का रोना रोने वालों के कारण रोजग़ार की पिछले 45 वर्षों में सबसे बदतर स्थिति रही। एक अन्य सीएमई की रिपोर्ट के अनुसार नोटबन्दी ने असंगठित क्षेत्र से 11 करोड़ नौकरियां नील कर दी, जिसकी मार देश के सबसे निचले तबके के लोगों पर पड़ी। यही नहीं मेक इन इंडिया का शेर गुर्राने-दहाडऩे के बजाय 5 साल तक मिमियाते रहा। पूंजी निवेश लाने और रोजगार सृजन- दोनों ही मामले में इवेंट मैनज्मेंट के सहारे कागज पर बनाया गया मेकइनइंडिया का शेर चारों खाने चित्त हो गया। संगठित, असंगठित, निजी व सरकारी क्षेत्र-सभी की स्थिति बद से बदतर है। हर क्षेत्र से रोजगार के अवसर खत्म ही नहीं हो रहे बल्कि कार्यरत मानव संसाधन की छटनी भी बदस्तूर जारी है। बीएसएनएल,ओएनजीसी जैसी नवरत्न कम्पनियों को जानबूझकर नीम हकीम नीतियों से घाटे में धकेला जा रहा है, विनिवेश की जमीन तैयार की जा रही है।  युवाओं व बेरोजगारों को अंधेरे में रखने के लिए सरकार ने तीन-तीन बार बेरोजगारी के आंकड़े प्रकाशित होने से रोक दिया गया। हाल ही में मुद्रा योजना के द्वारा करवाए गए बेरोजगारी पर एक रिपोर्ट को भी प्रकाशित होने से रोक दिया। श्रमिक वर्ग का 80 प्रतिशत कुल मानव संसाधन का एक चौथाई और कौशल प्राप्त कर्मियों का एक तिहाई भाग आज भी निर्धनता से जूझ रहा है। मोदी जी के आसमानी वादों के मारे करोड़ों युवा नौकरी की तलाश में दर-दर भटक रहे है। छलावा पार्टी की छलिया सरकार ने भर्ती के बहाने आवेदन पत्रों की फीस के नाम ही बेरोजग़ार युवाओं से हज़ारों करोड़ रुपए लूट लिए। अकेले रेलवे ने बेरोजगारों के आवेदनों से अरबों कमाए है।

युवाओं का ध्यान भटकाने के लिए सामाजिक सौहार्द के साथ खिलवाड़ हो रहा है। युवाओं को काल्पनिक शत्रु दिखा कर बेरोजगारी के सवाल से दूर किया जा रहा हैं। मोदी सरकार बेरोजगारी पर बात करने से क्यों डरती है, युवा साथियों से आग्रह है वो अपने जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दों को आगामी चुनाव में तरजीह दे। मोदी जी से 2014 के घोषणा पत्र पर सवाल जवाब करे।



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