शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के मुताबिक, केंद्र की मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का आश्वासन देती है, लेकिन इस तरह से काम करती है कि उन्हें अपेक्षित आय भी नहीं मिलती है.

 शिवसेना (उद्धव ठाकरे) ने प्याज पर 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाने के फैसले को लेकर मंगलवार को केंद्र की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार की नीति न तो किसानों और न ही उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है.

शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के मुखपत्र 'सामना' के एक संपादकीय के मुताबिक, केंद्र की मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का आश्वासन देती है, लेकिन इस तरह से काम करती है कि उन्हें अपेक्षित आय भी नहीं मिलती है.

केंद्र सरकार ने 19 अगस्त को खरीफ उत्पादन घटने की आशंका और खुदरा कीमतों में मजबूती के संकेतों के बीच स्थानीय उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्याज के निर्यात पर 40 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की थी.

नासिक प्याज उत्पादन के लिए देश भर में मशहूर
इस फैसले के कारण महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर नासिक जिले में किसानों और व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया. नासिक प्याज उत्पादन के लिए देश भर में मशहूर है.

सामना के संपादकीय में कहा गया, ''सरकार की नीति न तो किसानों के लिए फायदेमंद है और न ही उपभोक्ताओं के लिए. जब भी किसानों के लिए थोड़ा अधिक पैसा कमाने का मौका आता है, सरकार या तो निर्यात शुल्क का सहारा लेती है या निर्यात पर प्रतिबंध लगा देती है.''

शिवसेना (उद्धव ठाकरे) ने कहा कि प्याज पर 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाने का यह फैसला अचानक घोषित किया गया और देश के बंदरगाहों पर हजारों टन प्याज फंसा हुआ है. यदि यह प्याज सड़ जाता है, तो इसे न तो निर्यात किया जा सकता है और न ही देश के भीतर बेचा जा सकता है.

इसके जवाब में उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कुछ ‘‘राजनीतिक विरोधी’’ प्याज पर लगाए गए निर्यात शुल्क के बारे में ‘‘गलत तस्वीर’’ पेश कर रहे हैं. उन्होंने किसानों से चिंता न करने का आग्रह किया क्योंकि केंद्र ने अपने बफर स्टॉक के लिए 2,410 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद फिर से शुरू कर दी है.

गोयल ने कहा कि प्याज पर 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाने का निर्णय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है, लेकिन साथ ही केंद्र ने घबराहट में बिक्री से करने से बचाने के लिए किसानों से 2 लाख टन अतिरिक्त प्याज खरीदने का भी फैसला किया है.


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